तंत्र-मंत्र की एक रहस्यमयी कहानी


 

कहानी राजस्थान के एक छोटे से गांव की है। गांव का नाम था नागरपुर। यह गांव दूर-दूर तक अपने रहस्यमय वातावरण और पुरानी किंवदंतियों के लिए प्रसिद्ध था। कहा जाता था कि गांव के पास ही एक घना जंगल था, जहां गहरे तंत्र-मंत्र की साधना की जाती थी। इस जंगल का नाम था "काला वन।"

कहानी की शुरुआत

नागरपुर के गांववाले साधारण जीवन जीते थे। लेकिन उनके जीवन में एक अजीब-सा डर हमेशा बना रहता था। गांव के बुजुर्ग कहते थे कि काले वन में एक पुरानी हवेली है, जहां एक तांत्रिक साधु निवास करता है। उसकी साधनाओं की शक्ति इतनी प्रबल थी कि कोई भी उसके खिलाफ नहीं जा सकता था। लोग कहते थे कि जिसने भी उस हवेली में कदम रखा, वह कभी वापस नहीं आया।

मुख्य पात्र: अर्जुन

अर्जुन एक नौजवान था, जो नागरपुर में ही पैदा हुआ और बड़ा हुआ था। उसकी मां बचपन में ही गुजर गई थी और उसके पिता उसे तंत्र-मंत्र की कहानियां सुनाकर डराया करते थे। लेकिन अर्जुन बहुत बहादुर था। वह तंत्र-मंत्र जैसी बातों पर विश्वास नहीं करता था। वह हमेशा सोचता था कि ये सब सिर्फ मनगढंत कहानियां हैं, जिन्हें लोग डराने के लिए गढ़ते हैं।

एक दिन, अर्जुन ने अपने दोस्तों के सामने घोषणा की कि वह काले वन में जाकर उस रहस्यमयी हवेली का पता लगाएगा। गांववालों ने उसे बहुत मना किया, लेकिन अर्जुन अपनी जिद पर अड़ा रहा।

काले वन की यात्रा

रात का समय था, और पूरा गांव सो चुका था। अर्जुन ने अपनी मशाल उठाई और काले वन की ओर चल पड़ा। जैसे-जैसे वह जंगल में अंदर जाता गया, हवा ठंडी और भारी होती गई। चारों ओर घना अंधकार था, और सन्नाटा था। अर्जुन के मन में थोड़ा डर पैदा हुआ, लेकिन उसने अपने साहस को बनाए रखा।

अंत में, अर्जुन उस पुरानी हवेली के सामने पहुंचा। हवेली जर्जर और भयावह थी। उसकी दीवारों पर पुरानी लताओं का जाल था और खिड़कियों से गहरे अंधकार का आभास हो रहा था। अर्जुन ने मशाल की रोशनी में हवेली का दरवाजा खोला और अंदर चला गया।

हवेली के अंदर का रहस्य

हवेली के अंदर का दृश्य बहुत ही विचित्र था। चारों ओर तांत्रिक चिन्ह बने हुए थे, और दीवारों पर अजीब-सी चित्रकथाएं उकेरी हुई थीं। हवेली के बीच में एक बड़ा हवन कुंड था, जहां से अभी भी धुंआ उठ रहा था। अर्जुन ने जैसे ही उस हवन कुंड के पास कदम रखा, एक आवाज गूंजी, "कौन है जो मेरी साधना में विघ्न डाल रहा है?"

अर्जुन ने चारों ओर देखा, लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया। अचानक, हवेली के एक कोने से एक काले कपड़े में लिपटा हुआ तांत्रिक प्रकट हुआ। उसकी आंखों में गहरा लाल रंग था और उसके चेहरे पर अजीब-सा शांति और क्रूरता का मिश्रण था। तांत्रिक ने अर्जुन को देखा और कहा, "तुम्हारे आने का समय हो चुका है। अब तुम यहां से वापस नहीं जा सकते।"

तांत्रिक और अर्जुन का सामना

अर्जुन ने तांत्रिक से पूछा, "तुम कौन हो, और यहां क्या कर रहे हो?" तांत्रिक ने हंसते हुए कहा, "मैं इस हवेली का रक्षक हूं। मैं यहां सैकड़ों सालों से तंत्र साधना कर रहा हूं। जो भी मेरी साधना को भंग करने की कोशिश करता है, उसे इसकी सजा मिलती है।"

अर्जुन ने अपने साहस को बनाए रखा और कहा, "मैं तुम्हारी साधना से डरता नहीं हूं। मैं सिर्फ सच जानने के लिए आया हूं। अगर तुम सच में इतने शक्तिशाली हो, तो मुझे दिखाओ कि तुम क्या कर सकते हो।"

तांत्रिक ने एक माला से कुछ मंत्र जपना शुरू किया। हवेली में अचानक अजीब-सी आवाजें गूंजने लगीं। दीवारों पर उकेरी गई चित्रकथाएं जीवित हो गईं और उनके चेहरे डरावने रूप में बदलने लगे। अर्जुन ने महसूस किया कि वह हवेली के अंदर फंस गया है।

अर्जुन की विजय

लेकिन अर्जुन ने हार मानने से इंकार कर दिया। उसने अपने दिल की गहराइयों से प्रार्थना की और मां के द्वारा सिखाए गए एक प्राचीन मंत्र को जपना शुरू किया। जैसे ही उसने वह मंत्र पूरा किया, तांत्रिक की शक्तियां कमजोर पड़ने लगीं। उसकी आवाज धीमी हो गई और हवेली में चारों ओर फैली अंधकार की छाया धीरे-धीरे गायब होने लगी।

अर्जुन ने अपने अंदर की ताकत से तांत्रिक का सामना किया। उसकी मां का आशीर्वाद और अर्जुन की आत्मशक्ति ने तांत्रिक की शक्तियों को मात दे दी। तांत्रिक अंततः हार मान गया और वह हवा में विलीन हो गया। हवेली में चारों ओर का वातावरण शांति में बदल गया।

कहानी का अंत

अर्जुन ने अपनी मशाल उठाई और हवेली से बाहर निकल आया। उसने देखा कि बाहर सुबह हो चुकी थी और सूरज की किरणें जंगल के घने पेड़ों के बीच से चमक रही थीं। गांववाले अर्जुन की इस विजय से अत्यधिक प्रभावित हुए। उन्होंने उसे एक नायक के रूप में सम्मानित किया और काले वन की कहानियों का अंत हुआ।

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि साहस, आत्मविश्वास, और सच्चे दिल से की गई प्रार्थना किसी भी तंत्र-मंत्र की शक्तियों से अधिक प्रभावी होती है। अर्जुन ने न केवल तांत्रिक को हराया, बल्कि गांववालों को भी यह सिखाया कि सच्चाई और विश्वास से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती।

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