तंत्र-मंत्र की भूतिया कहानी: एक रात का रहस्य
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तंत्र-मंत्र की भूतिया कहानी: एक रात का रहस्य
परिचय
गाँव के एक किनारे पर स्थित पुराने हवेली को लोग भूतिया मानते थे। वर्षों से वह हवेली वीरान पड़ी थी। आस-पास के लोग दावा करते थे कि वहां अजीब घटनाएं होती हैं। हवेली के भीतर तंत्र-मंत्र का प्राचीन प्रयोग हुआ करता था, जिसके अवशेष आज भी हवेली में मौजूद थे।
कहानी की शुरुआत
रमेश और उसके तीन दोस्त, जो हमेशा रोमांच की तलाश में रहते थे, ने इस भूतिया हवेली में रात बिताने का निर्णय लिया। सभी ने तय किया कि वे आधी रात को वहां जाएंगे और सुबह तक रहेंगे। गाँव के बुजुर्गों ने उन्हें इस खतरनाक कदम से दूर रहने की सलाह दी, लेकिन उनकी जिज्ञासा ने उन्हें रोकने नहीं दी।
हवेली का वातावरण
रात होते ही, वे चारों हवेली की ओर बढ़े। हवेली के पास पहुंचते ही उन्हें अजीब-सी ठंडक महसूस हुई। हवेली के चारों ओर घनी झाड़ियों और पेड़ों ने वातावरण को और भी डरावना बना दिया था। हवेली की खिड़कियाँ टूटी हुई थीं, और उसके दरवाजे पर अजीब-सी धातु के निशान बने हुए थे।
हवेली के अंदर
हवेली के अंदर प्रवेश करते ही उन्होंने देखा कि वहां दीवारों पर तंत्र-मंत्र की चिह्न बने हुए थे। फर्श पर राख और पुराने दीपक पड़े हुए थे, जिन्हें देखकर साफ पता चलता था कि यहां कभी तांत्रिक साधना की जाती थी। दीवारों पर उकेरी गईं आकृतियाँ भयानक थीं, जिनमें अजीबो-गरीब चेहरों और आकृतियों को दर्शाया गया था।
रहस्यमय घटना
जैसे ही आधी रात का समय हुआ, हवेली के अंदर अचानक से तेज हवा का झोंका आया। हवा के साथ ही एक विचित्र आवाज गूंजने लगी। रमेश और उसके दोस्त सन्न रह गए। उन्हें महसूस हुआ कि कोई अदृश्य शक्ति उनके आस-पास घूम रही है। तभी अचानक से एक दरवाजा जोर से बंद हो गया, और एक पुराना दीपक अपने आप जल उठा।
तांत्रिक आत्मा का प्रकट होना
अचानक, एक कोने से धुएँ का एक गुबार उठा और उसमें से एक तांत्रिक की आत्मा प्रकट हुई। उसके हाथ में एक त्रिशूल था और वह मंत्र पढ़ रहा था। उसके चारों ओर आग की लपटें थीं, और उसकी आँखों में खून का रंग था। आत्मा ने रमेश और उसके दोस्तों की ओर इशारा किया और कहा, "तुमने मेरी साधना में विघ्न डाला है, इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।"
भागने का प्रयास
रमेश और उसके दोस्तों ने तुरंत भागने की कोशिश की, लेकिन हवेली का दरवाजा बंद हो चुका था। आत्मा ने चारों ओर से हवेली को घेर लिया था। तभी रमेश के दादा द्वारा दिया हुआ एक ताबीज उसके गले से बाहर निकल आया। ताबीज से निकली रोशनी ने उस आत्मा को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
अंत
जैसे-तैसे रमेश और उसके दोस्तों ने हिम्मत जुटाई और ताबीज के सहारे हवेली का दरवाजा खोलकर बाहर निकल आए। बाहर आते ही वे जमीन पर गिर पड़े और हवेली की ओर देखने लगे। हवेली के दरवाजे पर तांत्रिक की आत्मा अब भी खड़ी थी, लेकिन वे सुरक्षित बाहर निकल चुके थे।
इसके बाद रमेश और उसके दोस्तों ने प्रण लिया कि वे कभी फिर से ऐसी भयानक जगह नहीं जाएंगे। उन्होंने उस ताबीज को अपने पास रखा और गाँव में जाकर बुजुर्गों को सब कुछ बताया। गाँव के लोग समझ गए कि हवेली में वाकई कोई अदृश्य शक्ति थी और उन्होंने उसे कभी न जाने की कसम खाई।
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